Music Paper Ii Syllabus - School Lecturer (school EDU.) | Hoffawhy
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Exam Scheme
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Marks
Number of Questions
Exam Duration
300
150
3 Hours
Note :-
Negative marking: For every wrong answer, 1/3 of the marks prescribed for that particular question shall be deducted.
Paper includes questions from: Senior Secondary Level, Graduation Level, Post Graduation Level, Educational Psychology, Pedagogy, Teaching Learning Material, and Use of Computers and Information Technology in Teaching Learning.
हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति के प्रमुख सिद्धांत: राग समय सिद्धांत, भारतीय स्वरलिपि पद्धति का विकास तथा भातखंडे एवं पलुस्कर स्वरलिपि पद्धति का अध्ययन ।
वाद्य अध्ययन: वीणा, सितार, तानपुरा, सरोद, सारंगी, वायलिन, दिलरुबा, बांसुरी, तबला, पखावज वाद्यों का उद्गम, विकास, वर्तमान स्वरुप तथा प्रमुख कलाकार ।
घराना: गायन, तंत्री वाद्य तथा अवनद्ध वाद्यों के प्रमुख घराने ।
लोक संगीत एवं शास्त्रीय नृत्य: राजस्थानी लोक संगीत के गायन-वादन-नृत्य पक्ष, संगीताश्रित जाति/समुदाय की जानकारी । भारत की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियाँ ।
ऐतिहासिक अध्ययन: प्राचीन, मध्यकालीन तथा आधुनिक काल में भारतीय संगीत का इतिहास, प्रमुख ग्रंथों में वर्णित श्रुति-स्वर-सप्तक, प्रमुख ग्रन्थ एवं ग्रंथकारों का अध्ययन, राग वर्गीकरण का ऐतिहासिक अध्ययन ।
जाति गायन, ध्रुवा गायन, प्रबंध, रागालाप, रुपकालाप, आलप्ति, गीति-वानी, वाग्गेयकार लक्षण, गायक तथा वादक के गुण-दोष ।
कर्नाटक संगीत: कर्नाटक संगीत की त्रिमूर्ति, प्रमुख वाद्य, गीत शैलियाँ, स्वर तथा ताल व्यवस्था, कटपयादि का अध्ययन । हिन्दुस्तानी तथा कर्नाटक संगीत में प्रचलित गीत शैलियों का अध्ययन।
पाश्चात्य संगीत: पाश्चात्य स्वरलिपि पद्धति, हारमोनी–मेलोडी, कॉर्ड, स्केल-डायटोनिक, क्रोमेटिक, ईक्वली टेम्पर्ड । भारतीय, पाश्चात्य तथा कर्नाटक संगीत के शुद्ध स्वर सप्तक का अध्ययन । हिन्दुस्तानी तथा पाश्चात्य स्वरों की आन्दोलन संख्या तथा सेंट एवं सेवर्ट पद्धति से सप्तक विभाजन ।
राग: दस ठाट के आश्रय रागों का अध्ययन । शुद्धकल्याण, केदार, कामोद, हमीर, छायानट, हिंडोल, अल्हैया-बिलावल, दुर्गा, शंकरा, देसी, जोगिया, विभास, गुणक्री, रागेश्री, मियां मल्हार, बहार, जौनपुरी, दरबारी, अडाना, पूरिया, पूरियाधनाश्री, सोहनी, बसंत, श्री, कालिंगडा, मुल्तानी, जैजैवंती, तिलककामोद का परिचय।
दक्षिणी संगीत से उत्तर में प्रचलित राग: मधुवंती, हंसध्वनि, कलावती, किरवानी, चारुकेशी, आभोगी का परिचय ।
संगीतज्ञों का जीवन वृत्त और योगदान: स्वामी हरिदास, तानसेन, मीराबाई, महाराणा कुम्भा, नवाब वाजिद अली शाह, राजा चक्रधरसिंह, बालकृष्णबुवा इचलकरंजीकर, विष्णु नारायण भातखण्डे, विष्णु दिगंबर पलुस्कर, अल्लादिया खां, कृष्णराव शंकर पंडित, फैयाज़ खाँ, बड़े गुलाम अली खान, अब्दुल करीम खान, कुमार गंधर्व, ओमकारनाथ ठाकुर, मल्लिकार्जुन मंसूर, भीमसेन जोशी, जसराज, किशोरी अमोनकर, अमीर खां, विनायकराव पटवर्धन, इमदाद खां, इनायत खां, अलाउद्दीन खां, मुश्ताक अली खां, बिस्मिल्लाह खां, रवि शंकर, राम नारायण, निखिल बनर्जी, अब्दुल हलीम जाफर खां, पन्नालाल घोष, कुदऊ सिंह, शिव कुमार शर्मा, असद अली खां, कण्ठे महाराज, अनोखेलाल मिश्र, बिंदादिन महाराज, भैया गणपतराव, बिरजू महाराज, आचार्य कैलाश चन्द्रदेव बृहस्पति, लालमणि मिश्र ।
3. खंड - III: स्नातकोत्तर
वृन्दगान तथा वृंदवादन। ध्वनि सिद्धांत के मूल तत्त्व, उप–स्वर (हार्मोनिक्स)। रस सिद्धांत, राग और रस । मानव कंठ तथा कान की बनावट । राग ध्यान तथा राग चित्र । वैदिककालीन संगीत का अध्ययन । कला, सौन्दर्य तथा ललित कलाओं का परस्पर सम्बन्ध ।
प्रमुख रागांग एवं रागों का अध्ययन:
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अंग
राग
अंग
राग
कान्हड़ा
नायकी, कौंसी
तोड़ी
गुर्जरी, बिलासखानी
सारंग
मधुमाद, शुद्ध सारंग
बिलावल
देवगिरी, यमनी
बिहाग
बिहागडा, मारू बिहाग
खमाज
झिंझोटी, तिलंग
कल्याण
पूरियाकल्याण, श्याम कल्याण
मल्हार
गौड़मल्हार, मेघ मल्हार
कौंस
चंद्रकौंस, जोगकौंस
भैरव
बैरागी, अहीर भैरव
धनाश्री
पटदीप, भीमपलासी
नट
नट भैरव, नट बिहाग
4. भाग - IV: (शैक्षिक मनोविज्ञान, शिक्षा शास्त्र, शिक्षण-अधिगम सामग्री, कम्प्यूटर एवं सूचना तकनीकी का शिक्षण-अधिगम में उपयोग)
I. शैक्षिक मनोविज्ञान
शैक्षिक मनोविज्ञान की अवधारणा, क्षेत्र तथा कार्य।
किशोर अधिगमकर्ता की शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक, संवेगात्मक एवं नैतिक विकासात्मक विशेषताएँ तथा शिक्षण-अधिगम के लिए इसके निहितार्थ ।
अधिगम के व्यवहारवादी, संज्ञानात्मक एवं निर्मितवादी (Constructivist) सिद्धान्त तथा उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए इसके निहितार्थ ।
मानसिक स्वास्थ्य एवं समायोजन की अवधारणा तथा समायोजन युक्तियाँ।
संवेगात्मक बुद्धिमत्ता और शिक्षण-अधिगम में इसके निहितार्थ।
II. शिक्षा शास्त्र एवं शिक्षण-अधिगम सामग्री (किशोर अधिगमकर्ता हेतु अनुदेशनात्मक व्यूह रचनाएँ)
सम्प्रेषण कौशल तथा इसका उपयोग।
शिक्षण प्रतिमान (Teaching Models) - अग्रिम व्यवस्थापक, संप्रत्यय सम्प्राप्ति, सूचना प्रक्रिया (Information processing), पृच्छा प्रशिक्षण (Inquiry Training) |
शिक्षण के दौरान शिक्षण–अधिगम सामग्री तैयार करना तथा उपयोग करना।
सहकारी अधिगम
III. शिक्षण-अधिगम में कम्प्यूटर एवं सूचना तकनीकी का उपयोग
आई सी टी (ICT), हार्डवेयर (Hardware) एवं सॉफ्टवेयर (Software) की अवधारणा