अरस्तू का काव्य सिद्धान्त: अनुकरण, विरेचन और त्रासदी; लौंजाइनस उदात्त सिद्धान्त; क्रोचे- अभिव्यंजना सिद्धान्त; कॉलरिज कल्पना सिद्धान्त; टी.एस. एलियट परंपरा एवं निर्वैयक्तिकता सिद्धान्त, मार्क्सवादी साहित्य चिन्तन, उत्तर आधुनिकतावाद तथा विखण्डनवाद।
4. आदिकाल एवं मध्यकाल: निर्धारित पाठ
पृथ्वीराज रासो (पद्मावती समय) – चंदबरदाई, नागरी प्रचारणी सभा, वाराणसी
कबीर ग्रन्थावली – (सं. श्यामसुन्दर दास) – आरंभिक 20 पद, साखियाँ - गुरु कौ अंग एवं विरह कौ अंग (प्रकाशक – नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी)
मीराँ पदावली - सं० डॉ० शम्भुसिंह मनोहर (प्रका० रिसर्च पब्लिकेशनस, जयपुर) - भ्रमरगीत सार (सं. रामचन्द्र शुक्ल) 21 से 50 पद (प्रकाशक – नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी)
जायसी ग्रन्थावली – नागमती वियोग खंड (सं. रामचन्द्र शुक्ल) (प्रकाशक - नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी)
कवितावली तुलसीदास - पद संख्या 65 से 110 (नाम– विश्वास, कलि-वर्णन, राम-नाम-महिमा) (प्रकाशक – गीता प्रेस, गोरखपुर)